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अमरेन्द्र सहाय अमर सीतापुर यूपी के एक छोटे से गांव ओडाझार से हैं जो की एक कृषि प्रधान गांव है इनकी प्रारम्भिक � िक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से हुई जीवन के बीहड़ पथो से होकर इनको 15 वर्ष की आयु में लिखने का � ौक जगा परंतु अर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण कानपुर युनिवर्सटी से BA उत्रिण करने बाद आगे पढ़ाई न कर सके इसलिए पिता जी के साथ खेती करने में जुट गए । तमाम स्वप्नों को हृदय में धारण कर दिन खेत की मेड़ पर बीत जाता है ओर रात चारपाई पे इन्हीं के बीच जो समय मिला उसी में अपने जज्बातों को � ब्दो के माध्यम से कलम के सहारे अपनी डायरी में लिख लेते हैं

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तुम बिन सावन
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बेटियां
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    "Amrendra sahay amar" Poetry.com. STANDS4 LLC, 2021. Web. 27 Nov. 2021. <https://www.poetry.com/poet/Amrendra+sahay+amar>.

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