Rate this poem:(0.00 / 0 votes)

बेटियां



कोंख में मार दी गयी
जो मासूम नन्ही कलियां
लूट गया चमन जिनका
बहार आने से पहले
मेरे ख़्वाब में आती हैं
अक्सर सूरत उनकी
ओर चुपके से सरगो�

करतीं हैं कान में मेरे ।
खोलकर अपनी आँखें
उठकर बैठ जाता हूं
मैं अपने बिस्तर पर
नही देख सकता उनके
फूल से चेहरे पर
गम की इतनी काली बदली ।।
मुझसे पूंछती है अक्सर
अंकल क्या बनी नही थी
यह दुनिया मेरे लिए
थरथराते होठों से
नही नही ऐसा नही है
कहता तो हूं लेकिन
समझा नही पाता ख़ुद को मैं
कैसे उनके सर पर
प्यार से हांथ रखूं
जो समझा न सका बेटियों को
उस ज़माने को कैसे पास रखूं।।
Font size:
 

Submitted by Amrendrasahayamar on July 20, 2021

33 sec read
2 Views

Amrendra sahay amar

अमरेन्द्र सहाय अमर सीतापुर यूपी के एक छोटे से गांव ओडाझार से हैं जो की एक कृषि प्रधान गांव है इनकी प्रारम्भिक � िक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से हुई जीवन के बीहड़ पथो से होकर इनको 15 वर्ष की आयु में लिखने का � ौक जगा परंतु अर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण कानपुर युनिवर्सटी से BA उत्रिण करने बाद आगे पढ़ाई न कर सके इसलिए पिता जी के साथ खेती करने में जुट गए । तमाम स्वप्नों को हृदय में धारण कर दिन खेत की मेड़ पर बीत जाता है ओर रात चारपाई पे इन्हीं के बीच जो समय मिला उसी में अपने जज्बातों को � ब्दो के माध्यम से कलम के सहारे अपनी डायरी में लिख लेते हैं more…

All Amrendra sahay amar poems | Amrendra sahay amar Books

FAVORITE (1 fan)

Discuss this Amrendra sahay amar poem with the community:

0 Comments

    Translation

    Find a translation for this poem in other languages:

    Select another language:

    • - Select -
    • 简体中文 (Chinese - Simplified)
    • 繁體中文 (Chinese - Traditional)
    • Español (Spanish)
    • Esperanto (Esperanto)
    • 日本語 (Japanese)
    • Português (Portuguese)
    • Deutsch (German)
    • العربية (Arabic)
    • Français (French)
    • Русский (Russian)
    • ಕನ್ನಡ (Kannada)
    • 한국어 (Korean)
    • עברית (Hebrew)
    • Gaeilge (Irish)
    • Українська (Ukrainian)
    • اردو (Urdu)
    • Magyar (Hungarian)
    • मानक हिन्दी (Hindi)
    • Indonesia (Indonesian)
    • Italiano (Italian)
    • தமிழ் (Tamil)
    • Türkçe (Turkish)
    • తెలుగు (Telugu)
    • ภาษาไทย (Thai)
    • Tiếng Việt (Vietnamese)
    • Čeština (Czech)
    • Polski (Polish)
    • Bahasa Indonesia (Indonesian)
    • Românește (Romanian)
    • Nederlands (Dutch)
    • Ελληνικά (Greek)
    • Latinum (Latin)
    • Svenska (Swedish)
    • Dansk (Danish)
    • Suomi (Finnish)
    • فارسی (Persian)
    • ייִדיש (Yiddish)
    • հայերեն (Armenian)
    • Norsk (Norwegian)
    • English (English)

    Citation

    Use the citation below to add this poem to your bibliography:

    Style:MLAChicagoAPA

    "बेटियां" Poetry.com. STANDS4 LLC, 2021. Web. 27 Nov. 2021. <https://www.poetry.com/poem/105359/बेटियां>.

    Become a member!

    Join our community of poets and poetry lovers to share your work and offer feedback and encouragement to writers all over the world!

    More poems by

    Amrendra sahay amar

    »

    Browse Poetry.com

    Quiz

    Are you a poetry master?

    »
    "He was like a rainy Tuesday" is an example of ________.
    • A. metaphor
    • B. idiom
    • C. analogy
    • D. simile

    Our favorite collection of

    Famous Poets

    »